UPNL Outsourcing Employees News : उत्तराखंड में उपनल के जरिए काम कर रहे हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए आखिरकार बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से “समान कार्य के लिए समान वेतन” की मांग उठा रहे इन कर्मचारियों को अब नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन मिलने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। राज्य सरकार ने सैनिक कल्याण विभाग के माध्यम से संशोधित आदेश जारी कर दिया है, जिससे करीब साढ़े 13 हजार कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव संभव है। जिन कर्मचारियों को अब तक 19 से 20 हजार रुपये के आसपास वेतन मिल रहा था, उनकी सैलरी बढ़कर करीब 40 से 41 हजार रुपये या पद के अनुसार उससे अधिक भी हो सकती है। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों में खुशी का माहौल है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद बनी स्थिति
दरअसल यह पूरा मामला तब तेजी से आगे बढ़ा जब उत्तराखंड हाई कोर्ट ने समान काम कर रहे उपनल कर्मचारियों को समान वेतन देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर कर्मचारी नियमित स्टाफ की तरह ही काम कर रहे हैं, तो उन्हें वेतन में भेदभाव नहीं झेलना चाहिए। राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा गया। इसके बाद सरकार के सामने इसे लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई और आखिरकार समान कार्य के बदले समान वेतन लागू करने का फैसला लिया गया। करीब दस साल से कर्मचारी इस मांग को लेकर आंदोलन, ज्ञापन और कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे, जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है।
12 नवंबर 2018 तक नियुक्त कर्मचारियों को लाभ
सरकार की ओर से जारी संशोधित आदेश में साफ किया गया है कि 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त उपनल कर्मचारियों को इस फैसले का लाभ मिलेगा। पहले 25 अप्रैल 2015 तक दस साल की सेवा पूरी करने की शर्त रखी गई थी, जिससे कई कर्मचारी बाहर हो रहे थे। लेकिन अब कट ऑफ तारीख में बदलाव कर दिया गया है, जिससे ज्यादा कर्मचारियों को फायदा मिलेगा। वित्त विभाग की सहमति के बाद सैनिक कल्याण विभाग ने आदेश जारी किया है। अब इन कर्मचारियों को धीरे-धीरे संबंधित विभागों के अधीन लाया जाएगा और आउटसोर्स व्यवस्था से अलग किया जाएगा। इससे उनकी नौकरी की स्थिति भी पहले से ज्यादा मजबूत हो सकती है।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगी प्रक्रिया
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया एक साथ लागू नहीं होगी, बल्कि चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। पहले चरण में 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को लाभ दिया जाएगा। दूसरे चरण में 1 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा। विभागों को निर्देश दिया जाएगा कि वे पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार करें और उनके वेतन संशोधन की प्रक्रिया पूरी करें। 2018 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। सरकार ने इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है, लेकिन भविष्य में नई नीति की संभावना से इनकार भी नहीं किया गया है।
2018 के आदेश से जुड़ा पुराना मामला
यह पूरा विवाद 2018 के उस आदेश से जुड़ा है, जब हाई कोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के वेतन और नियमितीकरण के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा था। मामला धीरे-धीरे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और कई वर्षों तक सुनवाई चली। आखिरकार फरवरी 2026 में शासन स्तर पर समान कार्य के बदले समान वेतन देने का आदेश जारी किया गया। अब संशोधित कट ऑफ तारीख तय होने के बाद अमल की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि 2018 के बाद नियुक्त संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की ओर से भी समान लाभ देने की मांग उठ रही है। सरकार पर अब यह दबाव रहेगा कि वह भविष्य में सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए स्पष्ट और स्थायी नीति बनाए।
कर्मचारियों और राज्य की अर्थव्यवस्था पर असर
सैलरी बढ़ने से इन कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आएगा। परिवार की जरूरतें, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य खर्च और घर के अन्य खर्चों को संभालना आसान होगा। साथ ही जब हजारों कर्मचारियों की आय बढ़ेगी, तो इसका सकारात्मक असर स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अपने काम को और ज्यादा जिम्मेदारी से निभा सकेंगे। हालांकि सरकार के लिए यह वित्तीय बोझ भी बढ़ाएगा, लेकिन सामाजिक दृष्टि से यह कदम न्यायसंगत माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, उपनल कर्मचारियों के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद मिली बड़ी राहत है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विभाग स्तर पर यह आदेश कितनी तेजी और पारदर्शिता से लागू किया जाता है।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। वेतन, पात्रता और लागू होने की प्रक्रिया से संबंधित अंतिम और सटीक जानकारी के लिए संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना या उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी आदेश अवश्य देखें। नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव है।








